साइबर अपराध: डिजिटल जंग का नया खतरा! इसे जानना जरूरी है।

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hacker stoling data and money from bank account

साइबर अपराध के बारे में जानने से पहले हमे यह जानना जरुरी है की किसी भी व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाला कोई भी स्मार्टफ़ोन, टेबलेट, लैपटॉप और कंप्यूटर जो इंटरनेट से जुड़ा है केवल वही इस गंभीर अपराध का शिकार नहीं होते इसमें सामान्य फ़ोन जिसमे न तो इंटरनेट सुविधा होती है और न ही कोई स्मार्ट फ़ोन जैसे फीचर होते है वह भी अक्सर इसका शिकार बन जाते हैं|

साइबर अपराध करने की कोई भोगोलिक सीमा नहीं है इसे दुनिया के किसी भी हिस्से से किया जा सकता है| आज अधिकतर अपराध में मुजरिम/दोषी को पकड़ना नामुमकिन होता है| इस विषय में अधिक जानकारी के लिए आज आपको यह लेख इसके बारे में पूरी जानकारी के साथ इससे बचने के भी रास्ते बताय जा रहे है|

आप अपने आप को एक सफल साइबर जागरूक व्यक्ति तब मान सकते है जब आप इस अपराध के जाल में फसे किसी व्यक्ति को सही सलहा या सहायता देने में मदद करने में सक्षम हो|

किसी भी साइबर अपराध को कैसे जाने – किसी भी गैरकानूनी काम की शुरुआत तब शुरू होती है जब उसमे एक अनजान व्यक्ति दुसरे अनजान शक्स से फ़ोन काल या किसी मोबाइल ऐप पर भेजे गये ओ-टी-पी (एक बारी पासवर्ड) की मांग करता है| यह न्यूनतम 4 और अधिकतम 6 संख्या का हो सकता है| ओ-टी-पी अहम नंबर होता है जिसको बैंक अकाउंट से पैसे निकलने के लिए इंटरनेट इस्तेमाल के दौराम जरुरी माना जाता है|

आज की भाग दोड़ वाली जिंदगी में समय के साथ-साथ सभी इंटरनेट पर उपलब्ध ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट तथा अन्य वेब पोर्टल जहा अकाउंट और पासवर्ड बनाना जरुरी होता है उन सभी को हर 90 दिनों के अन्तराल में बदलाव की सख्त आवश्यकता होती है|

यदि कोई व्यक्ति सावधान नहीं बरते तो कोई आपका पासवर्ड चुरा सकता है और आपके खाते से पैसे निकाल सकता है। फिशिंग के जरिए कोई आपको नुकसान भी पहुंचा सकता है। साइबर ठग अक्सर किसी ऑफर के बारे में बताकर और लम्बी बातो में फसा कर आपके खाते में नंबर अपडेट करने के लिए तो कभी किसी और बहाने से ठगी का जाल बुनते हैं। ज्यादातर लोगों को इसके बारे में पता नहीं होता है, इसलिए उन्हें अपने जाल में फंसाना आसान हो जाता है।

आखिर कैसे शिकार बनते है मासूम लोग साइबर अपराध के

Cyber fraund

सोनू जो एक गैर सरकारी संगठन में कार्यरत है उनको वाट्सऐप पर एक दिन मेसेज आता है जो एक पैसा कमाने का लुभावना और आसन तरीका सोनू जी के साथ शेयर करते है| एक एप्प को डाउनलोड करके उसमे सिर्फ विज्ञापनों को देखने पर पैसे मिल जायेंगे|

सोनू जी को यह बहुत आसन लगा उन्होंने यह काम शुरू कर दिया 2 बार इसके लिए उन्हें पैसे दिए गये और सोनू जी को इस काम पर विश्वास हो गया पर एक दिन उनसे बैंक अकाउंट के जाँच के लिए मेसेज आया जिसमे उन्हें ओ-टी-पी (एक बारी पासवर्ड) की मांग की गयी| कुछ समय में सोनू जी ने 50 हज़ार की रकम अपने खाते से निकल जाने की बात पता चली|

साइबर अपराध की संख्या में तेजी इजाफा हुआ है तथा इसके तरीके हर दिन नया रूप ले रहे है|

साइबर क्राइम से बचाव के टिप्स

बैंक विवरण या कार्ड विवरण कभी भी किसी कॉल करने वाले के साथ साझा न करें।अनजान कॉलर/ईमेल को हमेशा शक की नजर से देखें।
रिमोट एक्सेस ऐप (एनीडेस्क टीमव्यूअर, क्विकसपोर्ट आदि) डाउनलोड न करें क्योंकि धोखेबाज को आपके मोबाइल फोन तक पहुंच मिल जाएगी।होने का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ कभी भी क्रेडिट/डेबिट केयर विवरण साझा न करें
बैंक/बीएसईएस/एमटीएनएल अधिकारी। कभी भी इंस्टैंट लोन ऐप डाउनलोड न करें। वे चीनी ऋण धोखाधड़ी हो सकते हैंapps.d+ कॉलर के निर्देश पर किसी भी मोबाइल ऐप को डाउनलोड करने के लिए कभी भी किसी लिंक पर क्लिक न करें।
सिम निष्क्रिय होने की स्थिति में, अपने लिंक्ड बैंक खाते को सुरक्षित करने के लिए तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें।अनजान नंबरों से व्हाट्सऐप पर कभी भी वीडियो कॉल अटेंड न करें।
गूगल पर कस्टमर केयर नंबर सर्च करने से सावधान रहें क्योंकि वेब सर्च में सबसे पहले नकली नंबर दिखाई देते हैं।याद रखें, आपके 3जी/4जी सिम को 5जी में बदलने की पेशकश करने वाले कॉलर्स धोखा दे सकते हैं।
भुगतान प्राप्त करने से भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन करते समय सावधान रहें। आप अपने खाते से पैसा खो सकते हैं।ऑनलाइन खातों के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (पासवर्ड+ओटीपी) का इस्तेमाल करें।
अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर मजबूत पासवर्ड रखें।

इसकी शिकायत कहां दर्ज करें?


केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा साइबर क्राइम या ऑनलाइन ठगी की घटनाओं को बंद करने और इनकी शिकायत दर्ज कराने के लिए एक नेशनल हेल्पलाइन नंबर (155260) जारी किया है|

वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में तुरंत 1930 पर कॉल करें या शिकायत दर्ज करें या www.cybercrime.gov.in